09 March 2019

चुनाव प्रचार में सैनिकों की फोटो के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग सख्त, दी चेतावनी!

चुनावी माहौल में राजनीतिक पार्टियां जनता को लुभाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाती हैं। इसी बीच चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिए है कि कोई भी दल अपने पोस्टरों में सेना के जवानों की फोटो लगाकर लाभ उठाने का प्रयास नहीं करें। आयोग की ओर जारी बयान में कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से यह संज्ञान में लाया गया था कि कुछ राजनीतिक दल सुरक्षाबल के जवानों की फोटो का इस्तेमाल चुनाव प्रचार और राजनीतिक प्रोपेगेंडा के लिए कर रहे हैं।

 

रक्षा मंत्रालय ने चुनाव आयोग को 2013 में एक पत्रा लिखा था जिसमें कहा गया है कि राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से सेना के जवानों की फोटो का इस्तेमाल किया जा रहा है और इस पर आयोग दलों को दिशा-निर्देश दे। मंत्रालय के इसी पत्र का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को जवानों की फोटो इस्तेमाल न करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग की ओर से कहा गया है कि ऐसा करने वाले नेताओं और दलों के खिलाफ कोई कार्रवाई आचार संहिता लागू होने के बाद ही की जा सकती है।

 

हाल ही में वायुसेना पायलट अभिनन्दन की तस्वीर का इस्तेमाल चुनावी पोस्टरों में किया गया था। इस पोस्टर पर अभिनंदन का कैरीकेचर बनाया हुआ है जिस पर साउथ एमसीडी की पूर्व मेयर सरिता गुप्ता के साथ वसन्त कुंज के निगम पार्षद का भी फोटो लगा है। माना जा रहा है कि सविता ने ही ये पोस्टर लगाए हैं। हालंकि उन्होंने इस बात से साफ इंकार कर दिया और कहा है कि ऐसे पोस्टर कहा लगे हैं उन्हें खुद नहीं पता है।

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने चुनावी पोस्टर की तस्वीर शेयर कर चुनाव आयोग से शिकायत की थी। योगेंद्र यादव ने पूछा कि क्या यह उचित है? एक सर्विंग सैनिक की तस्वीर का चुनावी पोस्टर में इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर नहीं तो इसके खिलाफ कार्रवाई करे।

 

पोस्टर विज्ञापन को लेकर बीजेपी, विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई है और लगातार ट्विटर पर बीजेपी को घेरा जा रहा है। इससे पहले विपक्ष ने पार्टी पर पुलवामा हमले के राजनीतिकरण का भी आरोप लगाया था। आलोचकों का कहना है कि बीजेपी एयर स्ट्राइक के नाम पर वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है।

चुनाव आयोग की यह सलाह राजनीतिक दलों को सतर्क करने के लिए जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि सुरक्षाबल देश की सीमाओं, क्षेत्र और पूरे राजनीतिक तंत्र के प्रहरी हैं। लोकतंत्र में उनकी भूमिका निष्पक्ष और गैर राजनीतिक है। इसी वजह से जरूरी है कि चुनाव प्रचार में सुरक्षाबलों का जिक्र करते हुए राजनीतिक दल और राजनेता सावधानी बरतना चाहिए।

 



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